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मजदूर दिवस के अवसर पर डॉ प्रभा शुक्ला ने लिखी स्वरचित रचना

अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस
- रिपोर्टर दिलीप माहेश्वरी
जो बासी, प्याज, चटनी, रोटी खाता
उससे ही ऊर्जा प्राप्त करता
दिनभर फिर मेहनत करता
जो स्वेद को बहा सहन करता
अपने ही श्रम का पालन करता
छोटे मकान से ले अट्टालिका बनाता
जिसकी मेहनत ही लाठी है
इसीलिए मजबूत उसकी काठी है
विकास की नींव वही है
उनके न होने से मंजिल दूर है
जो हमारे ख्वाबों को करता पूर्ण है
जो हर बाधा को करता दूर है
अगर वह न होता तो फिर
न होता कोई हवा महल
और न ही होता ये ताज महल
वो ही तो है दिन भर श्रम कर रात को बेफिक्र हो सोता
रोज कमाना, रोज खाना
ये है उसके जीवन का फसाना
खुश रहता है और खुशी देता है
वह है मेहनतकश मजदूर
जिसके श्रम का सम्मान होना
है उसका अपना अधिकार
अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर
उन सभी को हमारा सादर नमन बारंबार
स्व रचित
डॉक्टर प्रभा शुक्ला
बलौदा बाजार



